paisa hamara kab hoga


आज बहुत दिनों बाद ऐसा हुआ की किसी की  बात दिल को छू गई…  यूँ तो कुछ खास नहीं हुआ था पर यु लगा मानो उस बात पर गौर किया जा सकता है… मैं आज राजौरी गार्डेन मेट्रो स्टेशन से घर वापस आ रही थी… सो रोज़ की तरह आज भी घर के लिए रिक्शा ले लिया… घर के सामने पहुँचते ही मैंने अपनी जेब से पैसे निकले…. क्यूंकि सामान बहुत ज्यादा था इसलिए मुझे सामान  सँभालने मैं और पैसे देने मैं दिक्कत हो रही थी. मैंने बड़ी मुश्किल से एक दस रूपए का नोट ढूंढा. पर रिक्शा वाला भैया अपने आप मैं ही गुम था.. मुझे कुछ खीज हुई तो मैंने उससे कहा की भैया अपने पैसे तो ले लो… जवाब मैं वो पलटा, और पैसे लेते हुए कहने  लगा की ये तो आप ही का पैसा है, हमारा तो तब होगा जब हम किसी और को देंगे… 

मैं उसकी बात को गलत तो नहीं कह सकती… कहना बनता भी नहीं.. आखिर हमारा status इस बात से तय नहीं होता की हम कितना कम सकते हैं, असल बात तो ये है की हम आखिर खर्च कितना कर सकते हैं . ज़ाहिर सी बात है पैसे कमाना कोई मुश्किल कम नहीं लगता है लोगो को, पर पैसा उड़ाना बहुत मुश्किल काम है.

समझ नहीं आते हम पैसे के कैसे गोरखधंधे मैं फँस गए हैं. सुपरमार्केट मैं जाकर वो भी खरीद लेते हैं जो नहीं चाहिए. क्यूंकि वो उसकी वो रंगीन कागज़ मैं लिपटा है, हमारा पसंदीदा कलाकार या क्रिकेटर की तस्वीर उसमे बनी है, और सबसे बड़ी बात वो एक पे एक मुफ्त की स्कीम पर उपलब्ध है.. तो कोई क्यों न ये चीज़ लेना चाहे..

शो ऑफ नाम की चीज़ हमारे अन्दर के सीधे साधे इन्सान को किस कदर बेबस कर दिया है. अब महज़ कपडे नहीं लिए जाते, बड़े बड़े शो रूम से इम्पोर्टेड कपडे पहने जाते हैं. हर तरफ ब्रांड का साया घूम रहा है. उसे कोई फर्क नहीं पड़ता की आपको किस चीज़ की ज़रूरत है और किसकी नहीं, उसे बस इतना पता है आप जब भी बाज़ार जाने की सोचे, आप बस दौड़ते हुए पहले उस ब्रांड की तरफ आ जाये.

बाज़ार के मायाजाल मैं हम इस हद तक फंसे हुए हैं की चाह कर भी अपनी पसंद की नहीं बल्कि बाज़ार मैं जानी मानी चीज़ ही लेंगे.. और वजह बिलकुल साफ़ है… अगर फला कंपनी के टीवी के बजे दूसरी कंपनी का टीवी खरीद लिया तो पड़ोस की मिसेस शर्मा क्या सोचेंगी??

खैर लोगो की बात तो बाद मैं सोचूंगी.. मैं भी इसी चक्रव्यूह मैं फँसी हुई हूँ. शायद इस बात को न स्वीकारना अपने आपसे झूठ बोलने जैसा ही है..  बाकि बात रही बाज़ार की तो सोच रही हूँ की आज ब्रांड से डर रही हु, कल शायद खुद ही किसी ब्रांड को बाज़ार मैं बेचने के नुस्खे सोच रही हूँ. ताकि मेरे बाद भी कोई आकार इसी तरह से अपने तजुर्बे को लिख सके………

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s